Main aur mere Papa

आज पापा ऑफिस से जल्दी आ गए | वैसे तो वो जल्दी ही आ जाते है फिर शुरू होती है मेरी unlimited मस्ती | पापा का चश्मा उतारना, मुझे तो पापा चश्मे में बिल्कुल अच्छे नही लगते | इसलिए मैं तो उनका चश्मा खीच ही लेती हूँ | आज सुबह से ही मुझे कुछ अनमना सा फील हो रहा था आज तो मैंने नानी को भी बहुत परेशान किया | पर जैसे ही मम्मी पापा घर आए मैं खुश हो गई | पापा और मम्मी ने आज दादा-दादी से फ़ोन पर बात की और मैंने भी उनको अपनी आवाज़ सुनाई | दादी की तबियत आज कल कुछ ठीक नही है | मैं दुआ करुँगी की मेरी दादी जल्दी से ठीक हो जाए फिर मैं उनके साथ खूब खेलूंगी | आज फराह बाजी का बर्थ डे है | मैंने तो उनको विश कर दिया | आज तो आद्रा में सब पिकनिक पर गए थे | काश मैं भी वहां होती … पर कोई बात नही मेरे बर्थ डे पर जायेंगे |

Main aur mere papa    Main aur mere Papa    Main aur mere Papa

हाँ…… तो मैं क्या कह रही थी …. हाँ पापा और मेरी unlimited मस्ती | पापा पलंग पर लेटे थे और मैं उनके पेट पर चढ़ गई | और उनका चश्मा खीच लिया | और वो गया सीधे मुंह में … पापा ने बड़ी मुश्किल से बचाया अपना चश्मा | कभी मैं उनके पेट पर कभी चेहरे पर चढ़ जाती थी |

अच्छा अब खेलते खेलते कुछ थक गई हूँ … और मेरे डिनर का भी टाइम हो गया है | डिनर तैयार है मेरा और नानी और मम्मी मेरा वेट कर रही है | कल मिलते है …..