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“बालक ही मानव का पिता है”

विलियम वर्ड्सवर्थ

प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि, विलियम वर्ड्सवर्थ ने अपनी कविता ”द रेनबो” में उल्‍लेख किया है कि बच्‍चा मानव का पिता है। उनके अनुसार सभी सकारात्‍मक और नकारात्‍मक स्‍वभाव बाल्‍यावस्‍था के दौरान बनता है। यह कहा जाता है कि बाल्‍यावस्‍था में सीखी गई कुछ विशेषताएं, आदतें, लक्षण, गुण व्‍यक्ति में हमेशा बने रहते हैं। इस प्रकार बच्‍चे को एक ऐसे परिवेश में पालना अनिवार्य है जहां वह स्‍वस्‍थ मनोवृत्ति और सकारात्‍मक विशेषताएं अपना सके, ताकि वह एक संतुलित व्‍यक्ति के रूप में बड़ा हो और इन सबसे ऊपर एक अच्‍छा नागरिक बने, जिस पर देश को गर्व हो।

 

आयोजनआयोजन
भारत में 14 नवम्‍बर का दिन हम बाल दिवस के रूप में मनाते हैं, जो हमारे प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्‍मदिवस है, जिनके मन में बच्‍चों के लिए असीमित प्रेम और स्‍नेह था। वे बच्‍चों के बीच चाचा नेहरू के नाम से लोकप्रिय थे। इस दिन पर बाल्‍यावस्‍था से जुड़े आयोजन करते हैं, बच्‍चों की निर्दोष मुस्‍कुराहट और परियों जैसी आंखों की प्रशंसा करते हैं और इन सब के अलावा उन पर अपने प्रेम और स्‍नेह की बारिश करते हैं जो हमारे देश के उभरते हुए नागरिक हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र की सिफारिश पर 20 नवम्‍बर सार्वभौमिक बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

बाल दिवस हमें निश्‍छल और जिज्ञासु बनना सिखाता है जो एक बच्‍चे के जीवन की विशिष्टिता है और वह अपने सभी काम मुस्‍कुराहट के साथ पूरे करता है। पूरे देश में स्‍कूल, कॉर्पोरेट घराने, सामाजिक संगठन विशेष कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं, जिसमें क्विज़, फेंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं, कला प्रदर्शनियां आदि शामिल हैं।

सरकार ने बाल भवन नामक एक विशेष संस्‍थान बनाया है ताकि बच्‍चों की रचनात्‍मक संभाव्‍यता को बढ़ाने के लिए उन्‍हें विभिन्‍न गतिविधियों, अवसरों के साथ एक ऐसा सामान्‍य मंच प्रदान किया जा सके जहां उन्‍हें प्रयोग, रचनाशीलता और निष्‍पादन के अवसर मिलें ।

राष्‍ट्रपति से वार्तालाप

भारत के राष्‍ट्रपति देश भर से आए हजारों बच्‍चों से राष्‍ट्रपति भवन में मुलाकात करते हैं। बाल दिवस के अवसर पर राष्‍ट्रपति बच्‍चों का उत्‍साह बढ़ाते हैं और उन्‍हें उत्‍कृष्‍टता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। वे भारत की भावी संकल्‍पना के लिए आगे बढ़ते इन नन्‍हें मुन्‍नों से प्रेरणा पाते हैं।

राष्‍ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने बच्‍चों की शिक्षा के महत्‍व पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने भारतीय अध्‍यापकों और छात्रों की प्रशंसा उनके अनुशासन, कठिन परिश्रम और उत्तम मान्‍यता प्रणालियों के लिए की, जो दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

उनके पूर्ववती भारत के 11वें राष्‍ट्रपति, डॉ. ए पी जे अब्‍दुल कलाम को भी बच्‍चों के विकास में गहरी दिलचस्‍पी रही। उनका मानना है कि राष्‍ट्र का भविष्‍य उसके बच्‍चों के हाथों में होता है और उन्‍होंने देश से अनुरोध किया कि वे अपने आज का बलिदान करें ताकि हमारे बच्‍चे एक बेहतर कल देख सकें। देश भर से आए हुए बच्‍चों द्वारा पूछे गए प्रश्‍नों के उत्तरों का सत्र आज भी अत्‍यंत लोकप्रिय है।

राष्‍ट्रपति की बातचीत पर महत्‍वपूर्ण लिंक

 

सार्वभौमिक बाल दिवससार्वभौमिक बाल दिवस
1954 में संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने सिफारिश की कि बच्‍चों के बीच भाईचारे और आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए एक दिन अपनाया जाना चाहिए। हर वर्ष 20 नवम्‍बर को सार्वभौमिक बाल दिवस मनाया जाता है। यह संयुक्‍त राष्‍ट्र के अधिकार पत्र तथा बच्‍चों के कल्‍याण के आदर्शों और उद्देश्‍यों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित गतिविधि का एक दिन भी है।

सार्वभौमिक बाल दिवस संयुक्‍त राष्‍ट्र बाल निधि (यूनिसेफ) द्वारा किए जाने वाले सामाजिक कार्य का हिस्‍सा है। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा द्वारा 20 नवम्‍बर 1959 को बच्‍चों के अधिकारों की घोषणा भी अपनाई गई थी। पुन: उसी दिन वर्ष 1989, में बाल अधिकार अभिसमय (सीआरसी)  पर हस्‍ताक्षर किए गए। तब से 193 देशों ने इस अधिसमय की अभिपुष्टि की है।

बच्‍चों के लिए संविधानगत प्रावधान और विभाग

भारतीय संविधान देश के बच्‍चों को अनेक अधिकार और पात्रताओं की गारंटी संयुक्‍त राष्‍ट्र अभिसमय के अनुसार देता है। संविधान में इनके प्रावधान प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से अभिव्‍यक्ति किए गए हैं जो बाल्‍यावस्‍था की सुरक्षा, बाल शिक्षा और बाल श्रम उन्‍मूलन से संबंधित हैं।

  • अनुच्‍छेद 15(3) राज्‍य को बच्‍चों और महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है
  • अनुच्‍छेद 21क राज्‍य को 6 से 14 वर्ष की आयु वाले बच्‍चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की बाध्‍यता सौंपता है
  • अनुच्‍छेद 24 बच्‍चों के रोजगार पर रोकथाम लगाता है
  • अनुच्‍छेद 39(ड.) बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य की सुरक्षा का कार्य राज्‍य को सौंपता है
  • अनुच्‍छेद 39(च) राज्‍य को बाध्‍य बनाता है वह बच्‍चों को प्रतिष्ठित रूप से बढ़ने के सुरक्षित अवसर प्रदान करे।

केन्‍द्र और राज्‍य स्‍तरों पर अनेक विधायी प्रयास किए गए हैं। प्रमुख राष्‍ट्रीय विधायी विकासों में शामिल हैं:

संविधान के तहत बच्‍चों के अधिकारों पर महत्‍वपूर्ण लिंक

 

बाल श्रमबाल श्रम
बाल श्रम एक गंभीर मामला है और केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकारों ने इस समस्‍या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। बाल श्रम पर अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन और संयुक्‍त राष्‍ट्र जैसे मंचों पर लगातार दुनियाभर का ध्‍यान आकर्षित किया जाता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के संकल्‍प पर वर्ष 1979 अंतरराष्‍ट्रीय बाल वर्ष घोषित किया गया था।

बच्‍चों के लिए शैक्षिक योजना

भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना के परिवर्तन सार्वभौमिक पारंपरिक बाल शिक्षा की आवश्‍यकता हेतु सघन बनाए गए हैं। भारत सरकार के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है प्रारंभिक बाल्‍यवस्‍था शिक्षा की उच्‍च गुणवत्ता प्रदान करना, स्‍वदेशी प्रथाओं को संरक्षित रखना जैसे बहु भाषावाद, परिवार / समुदाय को शामिल करना, बड़े बच्‍चों को अपने छोटे बाई बहनों की देखभाल की भागीदारी और गंभीर वित्तीय कमियों के बावजूद सभी बच्‍चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना।

भारत सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा के लिए विभिन्‍न योजनाएं, कार्यक्रम और प्रयास आरंभ किए हैं, जिनका लक्ष्‍य बच्‍चों के भविष्‍य को आकार देना है।

 

राष्‍ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसआर)

राष्‍ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसआर) की स्‍थापना मार्च 2007 में बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम,2005 (4 MB) के तहत एक सांविधिक निकाय के रूप में की गई थी। इसका प्राथमिक अधिदेश देश में बाल अधिकारों को संरक्षण, प्रोत्‍साहन और सुरक्षा प्रदान करना है।

राष्‍ट्रीय बाल कार्य योजनाराष्‍ट्रीय बाल कार्य योजना
राष्‍ट्रीय बाल कार्य योजना, 2005 18 वर्ष तक की आयु के सभी बच्‍चों को सभी अधिकार सुनिश्चित करने का वचन देती है। सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी बच्‍चों की उत्तरजीविता, वृद्धि, निकास और संरक्षण के लिए सभी उपाय किए जाएंगे और एक समर्थनकारी परिवेश बनाया जाएगा, ताकि प्रत्‍येक बच्‍चा अपनी अंतर निहित संभाव्‍यता का लाभ उठा सके और एक स्‍वस्‍थ तथा उत्‍पादक नागरिक के रूप में बड़ा हो सके। इसके लिए सभी क्षेत्रों की सामूहिक वचनबद्धता और कार्रवाई की जरूरत है तथा सरकार पर सभी स्‍तरों पर परिवारों, समुदाय, स्‍वयं सेवी क्षेत्र, नागरिक समाज और स्‍वयं बच्‍चों को एक साथ लाने की जिम्‍मेदारी है। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

बच्‍चों के लिए पुरस्‍कार

राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार

राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार कार्यक्रम से उन बच्‍चों को मान्‍यता मिलती है जो वीरता के असाधारण कार्यों से अपनी एक विशिष्‍ट जगह बनाते हैं और वे अपना उदाहरण रखकर अन्‍य बच्‍चों को प्रेरणा देते हैं। वर्ष 1957 में एक असाधारण शौर्य की घटना इन राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कारों के जन्‍म का आधार है। प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने 4 फरवरी 1958 को दो बच्‍चों की वीरता और शौर्य के लिए प्रथम वीरता पुरस्‍कार प्रदान किए। तभी से भारतीय बाल कल्‍याण परिषद (आईसीसीडब्‍ल्‍यू) द्वारा प्रति वर्ष बच्‍चों को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार प्रदान किए जाते हैं।

पुरस्‍कारों का चयन आईसीसीडब्‍ल्‍यू द्वारा गठित उच्‍च अधिकार प्राप्‍त समिति द्वारा किया जाता है जिसमें विभिन्‍न सरकारी विभागों, गैर सरकारी संगठनों एवं आईसीसीडब्‍ल्‍यू के कार्यालय पदाधिकारी तथा सदस्‍य होते हैं। ये पुरस्‍कार गणतंत्र दिवस से पहले माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रदान किए जाते हैं। इसके बाद ये बच्‍चे गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्‍सा लेते हैं।

राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार की श्रेणियां :

  • भारत पुरस्‍कार
  • गीता चोपड़ा पुरस्‍कार
  • संजय चोपड़ा पुरस्‍कार
  • बापू गैधानी पुरस्‍कार (तीन)
  • सामान्‍य पुरस्‍कार

बाल कल्‍याण के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार

भारत में मानवीयता की एक समृद्ध विरासत है। ऐसे हजारों स्‍वयं सेवी संगठन और व्‍यक्ति हैं जो भावी भारतीयों के लिए एक स्‍वास्‍थ्‍यकर, अधिक समृद्धि और उत्‍पादक पीढ़ी की आधार शिला बनाने के लिए राष्‍ट्रीय प्रयासों में योगदान देते हैं। भविष्‍य को और भी मजबूत बनाने के इस स्‍वयं सेवी प्रयास द्वारा सामाजिक रूपांतरण का यह एक सशक्‍त साधन है, हमारे गांवों के लाखों लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए यह अनिवार्य है। भारत सरकार द्वारा बच्‍चों के लिए स्‍थापित किए गए विभिन्‍न पुरस्‍कार इस प्रकार हैं :

बाल कल्‍याण के लिए पुरस्‍कार

 

यह पोस्ट बाल दिवस पर केवल जानकारी बढ़ाने/उपलब्ध कराने के उद्धेश्य भारत.गोव.इन से साभार ली गयी है.