Laviza @ School सारे पैरंट्स की चाहत होती है कि वे अपने बच्चों को बेहतरीन परवरिश दें। वे कोशिश भी करते हैं, फिर भी ज्यादातर पैरंट्स बच्चों के बिहेवियर और परफॉर्मेंस से खुश नहीं होते। उन्हें अक्सर शिकायत करते सुना जा सकता है कि बच्चे ने ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया… इसके लिए काफी हद तक पैरंट्स ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि अक्सर किस हालात में क्या कदम उठाना है, यह वे तय ही नहीं कर पाते। इसीलिए मैंने पापा से कह कर अपने ब्लॉग में एक स्पेशल कॉलम शुरू करवाया है, "पापा कहते हैं", जो हर सोमवार को पोस्ट की जाएगी.

इस कॉलम में पापा आपसे ऐसे बातें शेयर करेंगे जो वो अक्सर वो अख़बारों में, ब्लॉग पर पढ़ते हैं या टीवी पर इस विषय पर कोई स्पेशल स्टोरी देखते हैं. इस कॉलम में शेयर की गयी बातें पूरी तरह से सम्बंधित लेखक (जिसके नाम का जिक्र किया जायेगा) का अपना विचार/शोध होगा, पापा सिर्फ यहाँ उसे प्रस्तुत करेंगे..

आज पढ़िए बच्चों के अच्छे और बुरे बिहेविअर के बारें में प्रियंका सिंह की नवभारत टाईम्स में छपी रिपोर्ट की पहली कड़ी, जो इस विषय के विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर है.

Laviza

एक्सपर्ट्स पैनल :
प्रो. अरुणा ब्रूटा, डिपार्टमेंट ऑफ सायकॉलजी, डीयू
श्यामा चोना, एजुकेशनिस्ट और एक्स-प्रिंसिपल, डीपीएस
एन. एन. नैयर, प्रिंसिपल, एपीजे स्कूल, नोएडा

आज इतना ही.. आपको ये कॉलम कैसा लगा जरूर बतायें… फिर मिलती हूँ आपसे.. 

तब तक के लिए बाय… बाय….

– आपकी लवी

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