आजकल फीफा वर्ल्ड कप का फीवर चारो तरफ है. तो ऐसे में मैं कैसे पीछे रहती. तो मैं भी बॉल लेकर पहुँच गयी ग्राउंड में.
 

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  अरे.. एक बात तो मैंने आपको बताया ही नहीं.. आज कल मैं गुडगाँव में हूँ. ज़ेबा बाजी और इशरत बाजी मुझे बहुत मिस कर रहे थे… और मैं भी… तो मैंने सोचा कुछ दिन गुडगाँव घूम आऊँ. 

और फुपी-फुपा जी की मैरिज एनिवर्सरी भी तो है. 🙂 वो भी सेलेब्रेट करना है ना…

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  तो मैं बता रही थी की कैसे मैं फूटबॉल खेलती हूँ. रोज़ शाम मैं, ज़ेबा बाजी और इशरत बाजी पहुँच जाते है पार्क में. हम कुछ अलग तरीके से खेलते हैं. फूटबॉल खेलने में पैर के साथ साथ क्रिकेट बैट का भी इस्तेमाल कर लेते हैं. 🙂 कुछ तस्वीरें देखिये हमारे खेल की.
 

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  ये देखिये, ये तिथि है. कभी कभी इसके साथ भी मैं खेलती हूँ. 
 

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   और जब खेलते खेलते थक जाओ तो, नरम नरम घास है ना…
 

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   चलो अब थक गए… घर चलते हैं…
 

आप खेलते हैं फूटबॉल  ? खेला कीजिये अच्छा होता है 🙂

अच्छा आप खेलिए फूटबॉल… मैं चली…. बाय बाय….
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– आपकी लवी
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